जो कभी वापस नहीं लौटीं: Untraced लड़कियां आखिर जाती कहां हैं? | Part 3

Untraced Girls & Women: जो कभी वापस नहीं लौटीं | भारत की सबसे डरावनी सच्चाई (Part 3)

Untraced लड़कियां और महिलाएं: जो लापता हुईं… और फिर कभी नहीं मिलीं (Part 3)

हर साल भारत में लाखों लड़कियां और महिलाएं लापता घोषित की जाती हैं। सरकारी रिकॉर्ड में दो शब्द इस्तेमाल होते हैं —

  • Traced — जिनका पता चल गया
  • Untraced — जिनका आज तक कोई सुराग नहीं

यही दूसरा शब्द — Untraced — इस लेख का सबसे डरावना हिस्सा है।

क्योंकि Untraced का मतलब सिर्फ “नहीं मिली” नहीं होता। इसका मतलब होता है —

  • कोई फाइल बंद हो गई
  • कोई परिवार टूट गया
  • कोई पहचान मिट गई
  • और अक्सर… कोई आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई

Untraced का असली मतलब क्या है?

जब पुलिस किसी लड़की या महिला को ढूंढ नहीं पाती, और केस सालों तक बिना नतीजे के पड़ा रहता है, तो उसे रिकॉर्ड में “Untraced” लिख दिया जाता है।

लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि:

  • केस technically बंद हो जाता है
  • जांच की रफ्तार थम जाती है
  • परिवार अकेला पड़ जाता है

और सिस्टम आगे बढ़ जाता है, जैसे कुछ हुआ ही न हो।


Untraced लड़कियां आखिर जाती कहां हैं?

यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है — और सबसे कम ईमानदारी से जवाब दिया जाता है।

सरकारी रिपोर्ट सीधे नहीं कहती, लेकिन सामाजिक संगठनों, कोर्ट केसों और जांच रिपोर्टों से कुछ सच्चाइयां बार-बार सामने आती हैं।


1. मानव तस्करी का अंधेरा नेटवर्क

भारत में मानव तस्करी कोई फिल्मी कहानी नहीं है। यह एक संगठित, बहु-राज्यीय नेटवर्क है।

Untraced लड़कियों का एक बड़ा हिस्सा:

  • सेक्स ट्रैफिकिंग
  • जबरन देह व्यापार
  • गुप्त कोठों

में धकेल दिया जाता है।

अक्सर:

  • नाम बदल दिए जाते हैं
  • पहचान के कागज़ छीन लिए जाते हैं
  • परिवार से संपर्क पूरी तरह तोड़ दिया जाता है

इस बिंदु के बाद “खोज” लगभग असंभव हो जाती है।


2. जबरन शादी और “बेची गई दुल्हनें”

कई Untraced लड़कियां अपराध की शिकार नहीं, बल्कि “खरीदी गई पत्नियां” बन जाती हैं।

विशेषकर:

  • लिंगानुपात असंतुलन वाले राज्य
  • ग्रामीण और पिछड़े इलाके

में लड़कियों को:

  • पैसे के बदले
  • फर्जी शादी के नाम पर
  • एक राज्य से दूसरे राज्य

भेज दिया जाता है।

इन मामलों में:

  • लड़की जीवित होती है
  • लेकिन उसकी आज़ादी मर चुकी होती है

3. घरेलू गुलामी और अवैध श्रम

कई लड़कियां:

  • घरेलू नौकरानी
  • फैक्ट्री वर्कर
  • गारमेंट यूनिट

के रूप में लाई जाती हैं।

फिर:

  • उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया जाता
  • फोन छीन लिया जाता है
  • काम के बदले पैसा नहीं दिया जाता

तकनीकी रूप से वे “जिंदा” होती हैं, लेकिन कानून के लिए “गायब”।


4. मानसिक स्वास्थ्य और आत्मनिर्वासन

एक कम चर्चा किया गया पहलू — मेंटल हेल्थ

कुछ महिलाएं:

  • घरेलू हिंसा
  • रिलेशनशिप ट्रॉमा
  • सामाजिक दबाव

से तंग आकर:

  • अपनी पहचान छोड़ देती हैं
  • दूसरे शहर में गुमनाम जीवन जीती हैं

ऐसे मामलों में:

  • वे खुद नहीं चाहतीं कि उन्हें खोजा जाए
  • परिवार को कभी सच्चाई नहीं मिलती

क्यों Untraced केस कभी हल नहीं होते?

यह सिर्फ अपराधियों की चालाकी नहीं, सिस्टम की कमजोरी भी है।

1. शुरुआती 48 घंटे की लापरवाही

सबसे अहम समय — और सबसे ज्यादा बर्बाद किया गया।

FIR देर से दर्ज होना, मोबाइल लोकेशन में देरी, CCTV फुटेज का मिट जाना —

यहीं केस कमजोर पड़ जाता है।


2. राज्यों के बीच तालमेल की कमी

अगर लड़की एक राज्य से दूसरे राज्य में चली जाए, तो:

  • डेटा शेयर नहीं होता
  • जांच अटक जाती है

और केस Untraced बन जाता है।


3. परिवार की सीमाएं

गरीब परिवार:

  • लंबी कानूनी लड़ाई नहीं लड़ पाते
  • बार-बार थाने नहीं जा पाते

धीरे-धीरे थक जाते हैं।

और सिस्टम भी।


Untraced का असर: सिर्फ आंकड़ा नहीं, ज़िंदगी

हर Untraced केस के पीछे:

  • एक मां है जो इंतज़ार करती है
  • एक पिता है जो टूट जाता है
  • एक परिवार है जो अधूरा रह जाता है

समाज इसे भूल जाता है, लेकिन परिवार नहीं।


क्या सरकार सच जानती है?

हां।

लेकिन:

  • पूरा सच रिपोर्ट में नहीं लिखा जाता
  • Untraced को “डेटा” बना दिया जाता है

क्योंकि:

  • सच डरावना है
  • और जवाबदेही मांगता है

समाधान: क्या अभी भी उम्मीद है?

हां — लेकिन सिर्फ तब, जब:

  • हर Untraced केस को खुला रखा जाए
  • राष्ट्रीय स्तर पर एक सेंट्रल डेटाबेस बने
  • मानव तस्करी को राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दा माना जाए
  • परिवारों को कानूनी और आर्थिक सहायता मिले

निष्कर्ष (Part 3)

Untraced लड़कियां और महिलाएं भारत की सबसे बड़ी अनदेखी त्रासदी हैं।

वे सिर्फ गायब नहीं हुईं —

वे सिस्टम से गिर गईं।

जब तक हर Untraced केस सिर्फ फाइल नहीं, बल्कि इंसानी कहानी माना जाएगा —

तब तक यह सिलसिला चलता रहेगा।

यह Part-3 एक सवाल छोड़ता है —

अगर आज आपकी बेटी लापता हो जाए, तो क्या सिस्टम उसे ढूंढ पाएगा?


👉 Part 4 पढ़ना न भूलें

आपने जाना कि Untraced लड़कियां कहां और कैसे सिस्टम से बाहर हो जाती हैं। लेकिन एक और सवाल सामने आता है — क्या सरकार और सिस्टम पूरी सच्चाई दिखाते हैं?

Part 4 में हम सरकारी आंकड़ों, डेटा और जमीनी हकीकत के बीच के फर्क को विस्तार से समझेंगे।

👉 Part 4 पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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