भारत में लापता लड़कियां और महिलाएं: राज्यवार सच्चाई और जमीनी हकीकत (Part 2)
Part-1 में हमने भारत में पिछले एक दशक के दौरान लापता हुई लड़कियों और महिलाओं के कुल आंकड़ों, कारणों और सामाजिक प्रभावों को समझा। लेकिन सवाल अब भी वही है —
आख़िर सबसे ज़्यादा लड़कियां और महिलाएं किन राज्यों से लापता हो रही हैं? और क्यों?
इस Part-2 में हम आंकड़ों के पीछे छिपी **राज्यवार सच्चाई**, **जमीनी कारण**, और **सिस्टम की उन कमजोरियों** को समझेंगे जिनकी वजह से हर साल लाखों महिलाएं गुमनाम हो जाती हैं।
उत्तर भारत: जहां आंकड़े सबसे डरावने हैं
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य है, और दुर्भाग्य से लापता लड़कियों और महिलाओं के मामलों में भी यह शीर्ष पर रहता है।
हर साल हजारों मामले दर्ज होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या:
- ग्रामीण इलाकों से
- गरीब परिवारों से
- कम उम्र की लड़कियों से
यहां प्रमुख कारण हैं:
- मानव तस्करी नेटवर्क
- बाल विवाह
- घरेलू हिंसा
- झूठे नौकरी या शादी के वादे
अक्सर परिवार FIR दर्ज कराता है, लेकिन शुरुआती 24–48 घंटे की लापरवाही पूरे केस को कमजोर बना देती है।
बिहार
बिहार में लापता लड़कियों का एक बड़ा कारण है — आर्थिक पलायन।
कई किशोरियां:
- काम की तलाश में
- एजेंट्स के झांसे में
- घरेलू नौकरानी के रूप में
दूसरे राज्यों में जाती हैं और फिर कभी वापस नहीं लौटतीं।
कई मामलों में परिवारों को यह तक नहीं पता होता कि उनकी बेटी किस शहर या राज्य में गई थी।
मध्य भारत: तस्करी का साइलेंट ज़ोन
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश को अक्सर “शांत राज्य” माना जाता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं।
यहां लापता लड़कियों की संख्या लगातार बढ़ी है।
मुख्य वजहें:
- आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी
- फर्जी एजेंसियां
- शिक्षा का अभाव
- गरीबी
कई मामलों में लड़कियों को शादी के नाम पर दूसरे राज्यों में बेच दिया जाता है।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों में लड़कियों के लापता होने की घटनाएं अक्सर दर्ज ही नहीं होतीं।
क्यों?
- पुलिस तक पहुंच नहीं
- भाषाई बाधाएं
- डर और अविश्वास
इसका मतलब है कि वास्तविक आंकड़े सरकारी रिकॉर्ड से कहीं ज्यादा हो सकते हैं।
पश्चिम भारत: शहरों में गुम होती महिलाएं
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र जैसे विकसित राज्य में भी लापता महिलाओं के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
मुंबई, पुणे, ठाणे जैसे शहरों में:
- घरेलू हिंसा
- लिव-इन विवाद
- आर्थिक दबाव
महिलाओं को घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं।
कई महिलाएं खुद जाती हैं, लेकिन बाद में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता।
गुजरात
गुजरात में लापता लड़कियों के कई मामले औद्योगिक इलाकों से जुड़े होते हैं।
कम उम्र की लड़कियां:
- फैक्ट्री काम
- घरेलू काम
- गारमेंट सेक्टर
के लिए लाई जाती हैं और फिर गायब हो जाती हैं।
पूर्वी भारत: सबसे ज्यादा अनदेखा क्षेत्र
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल लंबे समय से मानव तस्करी का संवेदनशील क्षेत्र रहा है।
सीमावर्ती जिलों से:
- लड़कियों की तस्करी
- फर्जी शादी
- विदेशों तक सप्लाई
के मामले सामने आते रहे हैं।
कई परिवार सालों तक अपनी बेटियों की कोई खबर नहीं पा पाते।
ओडिशा
ओडिशा के आदिवासी जिलों में लड़कियों का गायब होना अक्सर “सामान्य” मान लिया जाता है।
यही सबसे खतरनाक बात है।
यहां:
- बाल विवाह
- माइग्रेशन
- फर्जी नौकरी एजेंट
मुख्य कारण हैं।
दक्षिण भारत: कम आंकड़े, लेकिन अलग कहानी
कर्नाटक
कर्नाटक में लापता मामलों की संख्या उत्तर भारत की तुलना में कम है, लेकिन शहरी इलाकों में महिलाओं के गायब होने के मामले बढ़ रहे हैं।
आईटी शहरों में:
- मेंटल हेल्थ
- वर्क प्रेशर
- रिलेशनशिप इश्यू
अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
तमिलनाडु
तमिलनाडु में लड़कियों के लापता होने के मामलों में अक्सर परिवार की भूमिका भी सवालों में आती है।
कई बार:
- इंटरकास्ट रिलेशन
- सम्मान के नाम पर दबाव
लड़कियों को घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं।
दिल्ली: देश की राजधानी, सबसे बड़ी विफलता
दिल्ली में हर साल हजारों लड़कियां और महिलाएं लापता घोषित की जाती हैं।
यहां कारण हैं:
- तेज़ शहरीकरण
- झुग्गी बस्तियां
- माइग्रेंट आबादी
- कमजोर सामाजिक नेटवर्क
कई महिलाएं आती हैं, लेकिन गुमनाम होकर रह जाती हैं।
सबसे बड़ी समस्या: Traced vs Untraced
सरकारी रिकॉर्ड में दो शब्द बहुत अहम हैं:
- Traced (मिल गई)
- Untraced (आज तक नहीं मिली)
Untraced मामलों की संख्या हर साल डराने वाली है।
यही वो महिलाएं हैं:
- जिनकी कोई खबर नहीं
- जो सिस्टम से बाहर हो चुकी हैं
- जो अपराध नेटवर्क का हिस्सा बन चुकी हों
क्या यह सिर्फ अपराध है?
नहीं।
यह:
- सामाजिक असमानता
- आर्थिक शोषण
- लैंगिक भेदभाव
- सिस्टम की असफलता
का परिणाम है।
आगे क्या?
अगर यही हाल रहा, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और विकराल हो सकती है।
ज़रूरत है:
- डेटा की पारदर्शिता
- राज्यों के बीच समन्वय
- समय पर पुलिस कार्रवाई
- समाज की जागरूकता
निष्कर्ष (Part 2)
भारत में लापता लड़कियों और महिलाओं का मुद्दा केवल कुछ राज्यों की समस्या नहीं है।
यह पूरे देश का आईना है।
जब तक हर राज्य, हर जिला और हर समाज इस जिम्मेदारी को नहीं समझेगा, तब तक आंकड़े सिर्फ बढ़ते रहेंगे।
यह Part-2 सिर्फ विश्लेषण नहीं, एक चेतावनी है।
👉 Part 3 पढ़ना न भूलें
आपने देखा कि सबसे ज्यादा लड़कियां किन राज्यों से लापता हो रही हैं। लेकिन सबसे डरावना सवाल अब भी बाकी है — जो लड़कियां कभी वापस नहीं लौटीं, वे आखिर गईं कहां?
Part 3 में हम Untraced लड़कियों की उन कहानियों और सच्चाइयों को सामने लाएंगे, जिन पर अक्सर कोई बात नहीं करता।

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