2014 से 2025 तक भारत में बलात्कार: BJP सरकार की नाकामी, सोई हुई सत्ता और असुरक्षित देश की बेटियां

2014 से 2025 तक भारत में बलात्कार के आंकड़े: सत्ता में BJP और महिला सुरक्षा की हकीकत

2014 से 2025 तक भारत में बलात्कार के आंकड़े: सत्ता में BJP और महिला सुरक्षा की कड़वी सच्चाई

भारत को विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में गिना जाता है, जहां नारी को देवी का दर्जा दिया गया। लेकिन आज का भारत, खासकर 2014 के बाद, एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां महिला सुरक्षा केवल भाषणों और नारों तक सीमित होकर रह गई है।

साल 2014 में केंद्र की सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने “सुरक्षित भारत”, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन जब हम जमीनी हकीकत और सरकारी आंकड़ों को देखते हैं, तो तस्वीर कुछ और ही बयान करती है।


2014 के बाद बढ़ते बलात्कार के मामले: आंकड़े क्या कहते हैं?

सरकारी रिकॉर्ड (NCRB) के अनुसार, 2014 से लेकर 2022 तक भारत में लगभग 3 लाख से ज्यादा बलात्कार के मामले दर्ज किए गए। यह सिर्फ दर्ज मामलों की संख्या है — वास्तविक घटनाएं इससे कहीं अधिक मानी जाती हैं।

BJP शासन के दौरान:

  • लगभग हर दिन औसतन 80 से 90 बलात्कार के मामले दर्ज हुए
  • ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में अपराध बढ़ा
  • नाबालिग लड़कियों के साथ अपराधों में भी गंभीर इजाफा हुआ

यह सवाल उठना लाज़मी है कि अगर कानून सख्त थे, सरकार मजबूत थी, तो फिर अपराध क्यों नहीं रुके?


BJP सरकार की नीतियां: कागजों में सख्ती, जमीन पर ढील

BJP सरकार अक्सर दावा करती है कि उसने बलात्कार के मामलों में कानून सख्त किए हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि कानून तभी असरदार होता है जब उसका ईमानदारी से पालन हो

हकीकत यह है:

  • ज्यादातर मामलों में FIR दर्ज होने में देरी
  • राजनीतिक दबाव में आरोपी खुलेआम घूमते रहे
  • कई मामलों में आरोपी सत्ताधारी दल से जुड़े पाए गए

जब सत्ता में बैठी पार्टी के नेता ही आरोपियों के साथ खड़े दिखें, तो न्याय की उम्मीद कैसे की जाए?


राजनीतिक संरक्षण और अपराधियों का हौसला

2014 के बाद कई ऐसे मामले सामने आए, जहां बलात्कार के आरोपी:

  • स्थानीय BJP नेता या कार्यकर्ता थे
  • उनके खिलाफ कार्रवाई में महीनों-सालों की देरी हुई
  • पीड़िताओं और उनके परिवारों को धमकाया गया

यह कोई एक-दो राज्य की बात नहीं, बल्कि देशभर का पैटर्न बन चुका है।

जब अपराधी को यह भरोसा हो जाए कि सत्ता उसके साथ है, तो अपराध रुकने की बजाय और बढ़ते हैं।


“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” बनाम जमीनी हकीकत

BJP का सबसे चर्चित नारा रहा — बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

लेकिन सवाल यह है:

  • क्या बेटियां वाकई सुरक्षित हैं?
  • क्या स्कूल, कॉलेज, सड़कें सुरक्षित हुईं?
  • क्या महिलाओं को न्याय समय पर मिला?

अगर जवाब “नहीं” है, तो यह नारा केवल एक राजनीतिक प्रचार बनकर रह जाता है।


न्याय व्यवस्था की धीमी रफ्तार

BJP सरकार के दौरान:

  • लाखों मामले अदालतों में लंबित रहे
  • फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणाएं कागजों तक सीमित रहीं
  • पीड़िताओं को सालों तक न्याय का इंतजार करना पड़ा

जब तक न्याय देर से मिलता रहेगा, तब तक अपराधियों के हौसले बुलंद रहेंगे।


सामाजिक प्रभाव: डर में जीती महिलाएं

इन आंकड़ों का असर केवल रिपोर्टों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर हर आम महिला की जिंदगी पर पड़ा है।

  • रात में बाहर निकलने का डर
  • काम, पढ़ाई और आज़ादी पर रोक
  • परिवारों में असुरक्षा का माहौल

यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।


सरकार की जवाबदेही तय क्यों नहीं?

लोकतंत्र में सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। लेकिन BJP शासन में:

  • आलोचना करने वालों को देशद्रोही कहा गया
  • मीडिया का बड़ा हिस्सा चुप रहा
  • असल मुद्दों से ध्यान भटकाया गया

जब सवाल पूछना गुनाह बन जाए, तब हालात और बिगड़ते हैं।


समाधान क्या है?

अगर वाकई महिलाओं की सुरक्षा चाहिए, तो:

  • राजनीतिक संरक्षण खत्म करना होगा
  • कानून को बिना भेदभाव लागू करना होगा
  • पीड़िता-केंद्रित न्याय प्रणाली बनानी होगी
  • सरकार को जवाबदेह बनाना होगा

सिर्फ भाषण और नारे अब काफी नहीं हैं।


निष्कर्ष: सवाल सत्ता से है, राजनीति से नहीं

यह लेख किसी महिला के दर्द पर राजनीति करने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता में बैठी BJP सरकार से सवाल पूछने के लिए है।

2014 से 2025 तक के आंकड़े साफ बताते हैं कि महिला सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार पूरी तरह असफल रही है

जब तक सच को स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक न तो अपराध रुकेंगे और न ही बेटियां सुरक्षित होंगी।

अब समय है कि सवाल पूछे जाएं — और जवाब मांगे जाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या 2014 के बाद बढ़े बलात्कार के मामलों की जिम्मेदारी BJP सरकार की नहीं है?
बिल्कुल है। 2014 से केंद्र में BJP की सरकार है और कानून-व्यवस्था सीधे उसी की जिम्मेदारी बनती है। अगर इतने वर्षों में बलात्कार के मामले कम नहीं हुए, तो यह साफ संकेत है कि सरकार की नीतियां और उनका क्रियान्वयन पूरी तरह असफल रहा है।
जब महिलाएं असुरक्षित हैं, तो सरकार “बेटी बचाओ” का दावा कैसे कर सकती है?
यही सबसे बड़ा सवाल है। नारे और विज्ञापन चलाने से बेटियां सुरक्षित नहीं होतीं। जमीनी हकीकत यह है कि महिलाएं आज भी डर में जी रही हैं और सरकार सिर्फ आंकड़ों और भाषणों के पीछे छिपी हुई है।
क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन हालातों से अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं?
नहीं। जब कोई नेता 10 साल से ज्यादा समय से सत्ता में हो, तो वह जवाबदेही से नहीं बच सकता। देश में महिलाओं पर हो रहे अपराधों के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार जिम्मेदार ठहराई जानी चाहिए।
क्या BJP नेताओं को आरोपियों का राजनीतिक संरक्षण मिला है?
कई मामलों में देखा गया है कि आरोपी सत्ताधारी दल से जुड़े हुए थे, जिसके कारण कार्रवाई में देरी हुई। जब अपराधियों को राजनीतिक बचाव मिलता है, तो उनका हौसला और बढ़ता है।
सरकार क्यों चुप है और देश की जनता क्यों परेशान है?
सरकार अपनी छवि बचाने में व्यस्त है और जनता सुरक्षा के लिए तरस रही है। बेरोजगारी, महंगाई और महिला अपराध — इन सब पर सरकार की चुप्पी यह साबित करती है कि आम नागरिक की चिंता उसकी प्राथमिकता नहीं है।
क्या सिर्फ कानून सख्त करने से बलात्कार रुक जाएंगे?
नहीं। जब तक सत्ता में बैठे लोग ईमानदारी से कानून लागू नहीं करेंगे, और राजनीतिक संरक्षण खत्म नहीं होगा, तब तक कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगे।
क्या जनता को अब सरकार से सवाल पूछने चाहिए?
बिल्कुल। लोकतंत्र में सवाल पूछना गुनाह नहीं है। अगर सरकार जवाब नहीं दे रही, तो जनता को आवाज उठानी ही पड़ेगी। चुप्पी ही सबसे बड़ी हार होती है।

लेखक: Mr. Manoj Jarwal
स्वतंत्र विश्लेषण | सामाजिक और खोजी लेख

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