दिल्ली में वायु-गुणवत्ता (AQI) का हाल-चाल: कारण, असर और क्या करें?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस समय वायु गुणवत्ता एक चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुकी है। सुबह-सुबह या शाम के समय, बाहर निकलना और खुली हवा में साँस लेना सामान्य बात नहीं रही। सार्वजनिक स्वास्थ्य जगत और पर्यावरण विभाग लगातार अलर्ट जारी कर रहे हैं। आइए विस्तार से देख लेते हैं कि इस स्थिति का डेटा क्या कह रहा है, कारण क्या हैं, किस तरह यह हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, और हम खुद क्या कदम उठा सकते हैं।
वर्तमान डेटा और स्थिति
हाल ही में रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुँच गया है, जिसे ‘गंभीर’ या ‘रेड ज़ोन’ की श्रेणी में माना जाता है। उदाहरण के लिए, कुछ क्षेत्रों में 400 + का मान दर्ज हुआ है।
एक अन्य स्रोत में बताया गया है कि दिल्ली का AQI 355 तक पहुँच गया था और इसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी में वर्गीकृत किया गया।
रियल-टाइम डेटा देखने पर अलग-अलग स्थानों के मान इस तरह हैं:
- PM2.5 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा बहुत अधिक — उदाहरण के लिए 213 µg/m³ दर्ज हुआ एक स्टेशन में।
- तकनीकी तौर पर जेनेरल AQI यूएस स्केल में 300 से ऊपर ‘अत्यधिक अस्वस्थ’ (Severe) या ‘हानिकारक’ (Hazardous) श्रेणी में पड़ रहा है।
कैसे मापा जाता है AQI?
AQI यानी वायु-गुणवत्ता सूचकांक एक ऐसा मानक है, जो मुख्य वायु-प्रदूषकों (जैसे PM2.5, PM10, NO₂, SO₂, CO, ओजोन) की मात्रा को देखकर तय किया जाता है कि हवा किस श्रेणी में है — अच्छी, मध्यम, खराब, बहुत खराब या खतरनाक।
उदाहरण के लिए, यदि AQI 0-50 के बीच हो तो इसे ‘अच्छा’ माना जाता है; वहीं 300 + वाला अंक ‘खतरनाक’ श्रेणी में आता है जहाँ सभी को बाहर निकलने से बचना चाहिए।
मुख्य कारण — क्यों दिल्ली की हवा इतनी बिगड़ी?
दिल्ली की खराब वायु गुणवत्ता के पीछे कई कारण हैं, जिनमें से प्रमुख हैं:
- कृषि अवशेष का जलना (स्टबल बर्निंग): आसपास के राज्यों में फसल कटाई के बाद खेतों में अवशेष जलाया जाना दिल्ली-एनसीआर की हवा में धुआँ एवं कणों को लाता है।
- वाहन उत्सर्जन: लाखों निजी और सार्वजनिक वाहन, विशेषकर पुराने डीजल-जित वाहन, लगातार NO₂ व PM10 उत्सर्जित करते हैं।
- निर्माण व धूल: शहर में हो रही तीव्र निर्माण गतिविधियाँ, मिट्टी-धूल का फैलाव तथा खुले निर्माण स्थल व मेट्रो-साइट्स भी गंभीर भूमिका निभाते हैं।
- मौसम व वेंटिलेशन की कमी: सर्दी के मौसम में हवाएँ धीमी हो जाती हैं, हवा नीचे से ऊपर नहीं उठ पाती और प्रदूषित वायु एक-जगह पर ठहर जाती है। उदाहरण के लिए, तापमान में गिरावट और कम हवा के कारण कणों का संचय होता है।
स्वास्थ्य पर असर — कौन-कौन सुरक्षित नहीं?
जब AQI ‘बहुत खराब’ या ‘खतरनाक’ श्रेणी में पहुँचता है, तो इसका असर हर किसी पर पड़ता है, लेकिन विशेष रूप से ये समूह अधिक प्रभावित होते हैं:
- रुक्षश्वसन संबंधी रोगों वाले मरीज
- बच्चे व नवजात शिशु
- बुजुर्ग व हृदय-रोगी व्यक्तियों
प्रदूषण के कारण आँखों में जलन, खांसी, गले में खराश, सांस फूलना और थकान जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। लगातार खराब हवा में रहने से लंबे समय तक फेफड़ों के रोग, हृदय सम्बन्धी खतरे व जीवन प्रत्याशा में कमी होने की संभावना है।
दिखावे में क्या बदलाव आ रहा है?
कुछ रिपोर्ट्स से पता चला है कि हाल-ही में हवा की स्थिति में थोड़ी राहत दिखी है — जैसे कुछ क्षेत्रों में AQI 245 के स्तर पर आया था जो कि कुछ-सुधार का संकेत है। लेकिन यह सुधार अल्पकालिक है और कई इलाकों में स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
क्या सरकार व प्रशासन कुछ कर रहे हैं?
हाँ, दिल्ली सरकार व केंद्रीय पर्यावरण विभाग ने कई कदम उठाए हैं, जैसे:
- वाहन संख्या नियंत्रण व दिल्ली-एनसीआर में निजी वाहन प्रतिबंध
- निर्माण स्थलों पर वायु-प्रदूषण नियंत्रण उपाय लागू करना
- एयर प्यूरीफायर व मास्क पोर्टल/सहायता योजनाओं को प्रोत्साहित करना
- लॉन्ग टर्म योजनाओं में हरित क्षेत्र बढ़ाना, सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करना और कृषि अवशेष प्रबंधन सुधारना
हालाँकि इन प्रयासों के बावजूद, यूनिट-एंड-सिस्टम स्तर पर तेजी से बदलाव नहीं दिख रहा है और नागरिकों को अभी भी अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी पड़ रही है।
आप खुद क्या कर सकते हैं?
हवा ख़राब होने की स्थिति में निम्नलिखित सुझाव आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं:
- यदि संभव हो तो बाहर निकलने से बचें, विशेष रूप से स्कोर ‘300+’ की स्थिति में।
- जब बाहर जाना हो तो N95 या योग्य मास्क पहनें जो PM2.5 कणों से बचाव कर सके।
- घर में एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें और सुबह-शाम के समय खिड़कियाँ बंद रखें।
- सिर्फ खुली जागाओं में व्यायाम व दौड़-भाग न करें।
- प्रदूषण-रहित दिनों में सार्वजनिक परिवहन या पैदल चलने को प्राथमिकता दें।
- नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जाँच करा लें, विशेष रूप से यदि आप अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या हृदय-रोग से ग्रस्त हों।
नीचे देखें एक विशेष लिंक:
अगर आप भारत में **सड़क यातायात, निर्माण गतिविधियों व कृषि अवशेष प्रबंधन** जैसे विषयों पर गहरी समझ चाहते हैं, तो देखें — यह आर्टिकल (InfoZIND ब्लॉग)।
और पाठकों के लिए बाहरी स्रोत:
विस्तृत व वास्तविक समय के डेटा एवं विश्लेषण के लिए देखें — Times of India – दिल्ली में ‘रेड ज़ोन’ दर्जा और प्रश्न GRAP-3 का.
निष्कर्ष
दिल्ली में इस समय वायु-प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। स्थिति यह है कि हवा में मौजूद कण, धुँआ, वाहन व निर्माण कचरा, खेतों से उठने वाला धुआँ व मौसम संबंधी कारक मिलकर उस सीमा को पार कर चुके हैं जहाँ बहुसंख्यक नागरिक प्रतिदिन प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि प्रशासनिक व नीतिगत उपाय बनने लगे हैं, लेकिन व्यक्तिगत जागरूकता व जीवनशैली में बदलाव भी अब अनिवार्य हो गया है। अगर हम सभी मिलकर कदम उठाएँ — अपने-अपने स्तर पर मास्क पहनना, प्रदूषण स्थिति को जानना, सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करना एवं निर्माण-घरेलू स्रोतों को नियंत्रित करना — तो आने वाले समय में हवा की गुणवत्ता में सुधार संभव है। आइए इस दिशा में मिलकर काम करें।


0 Comments