ऑनलाइन जुआ-सट्टा मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

ऑनलाइन जुआ-सट्टा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

ऑनलाइन जुआ-सट्टा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा

नई दिल्ली: भारत के Infoz News की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑनलाइन गेमिंग कानून से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ई-स्पोर्ट्स गेम्स के नाम पर चल रहे ऑनलाइन जुआ-सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स पर सख्त कार्रवाई की जाए।

26 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

जस्टिस जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि सभी याचिकाकर्ताओं को केंद्र द्वारा दाखिल जवाब की कॉपी दी जाए ताकि वे भी अपना पक्ष समय पर रख सकें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।

ई-स्पोर्ट्स के नाम पर चल रहा जुआ

एक शतरंज खिलाड़ी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि ई-स्पोर्ट्स की आड़ में चल रहे ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी के प्लेटफॉर्म्स की जांच की जाए। कई ऐप्स, जो खुद को गेमिंग या स्किल-बेस्ड गेम बताते हैं, वास्तव में पैसों के लेन-देन वाले जुआ प्लेटफॉर्म्स हैं।

नया ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025

सरकार ने 20 अगस्त को “प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025” लोकसभा में पास किया था, जिसे 22 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। इस कानून के तहत किसी भी प्रकार के “रियल मनी गेम” यानी पैसों से खेले जाने वाले गेम्स पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है।

कानून के मुख्य प्रावधान

  • रियल-मनी गेम्स को ऑफर करना या प्रमोट करना गैरकानूनी है।
  • उल्लंघन करने वालों को 3 साल की जेल या 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना।
  • विज्ञापन देने वालों पर भी 2 साल की सजा और 50 लाख रुपए का जुर्माना।
  • सरकार एक विशेष रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाएगी जो गेमिंग इंडस्ट्री को नियंत्रित करेगी।
  • ई-स्पोर्ट्स और बिना पैसों वाले सोशल गेम्स को बढ़ावा मिलेगा।

सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर हुआ मामला

8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की उस याचिका को मंजूरी दी थी जिसमें इस कानून को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को तीन हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग की गई थी ताकि अलग-अलग राज्यों से विरोधाभासी फैसले न आएं।

ऑनलाइन जुए से समाज को नुकसान

एडवोकेट विराग गुप्ता ने कोर्ट में बताया कि देश में करीब 2,000 ऐसे ऐप्स हैं जो ऑनलाइन सट्टेबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं। इनसे न सिर्फ युवाओं में लत बढ़ रही है बल्कि पारिवारिक और आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला 15 करोड़ बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

इंडस्ट्री पर असर और विवाद

भारत में लगभग 65 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े हैं, जिनमें से अधिकतर लोग “रियल मनी गेम्स” खेलते हैं। इस सेक्टर का वार्षिक कारोबार लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपए का था।

हालांकि, इस कानून के लागू होते ही ड्रीम11, माय11सर्कल, गेम्सक्राफ्ट और पोकरबाजी जैसी कंपनियों ने अपने मनी-बेस्ड गेम्स को बंद करने की घोषणा कर दी है। इससे इंडस्ट्री में दो लाख से अधिक नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है और सरकार को भी लगभग 20 हजार करोड़ टैक्स राजस्व का नुकसान हो सकता है।

कंपनियों की प्रतिक्रिया

A23 की पैरेंट कंपनी हेड डिजिटल वर्क्स ने कहा है कि यह कानून उन स्किल-बेस्ड गेम्स पर भी लागू किया जा रहा है जिन्हें पहले सुप्रीम कोर्ट ने वैध ठहराया था। कंपनी का कहना है कि यह व्यवसाय करने के मौलिक अधिकार का हनन है।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि यह कानून युवाओं को लत और आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए लाया गया है। IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार पहले गेमिंग कंपनियों और बैंकों से चर्चा कर चुकी है और सभी हितधारकों के सुझाव लिए गए हैं।

भविष्य की राह

अब देखना यह है कि 26 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई में क्या फैसला सामने आता है। अगर कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया, तो भारत में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है।

पूरा मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है, लेकिन एक बात तय है कि भारत अब “ऑनलाइन जुए के खिलाफ सख्त कदम” उठाने की दिशा में बढ़ चुका है।

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यह लेख Infoz न्यूज़ पोर्टल के लिए तैयार किया गया है। अधिक अपडेट्स के लिए विज़िट करें — Infoz Cricket News

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